कैंसर रोगियों के लिए आयुर्वेदिक फॉर्मूला विकसित – डॉ. हरीश वर्मा

कैंसर एक गंभीर एवं जानलेवा बीमारी है, जिसके उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही घातक सिद्ध हो सकती है। वर्तमान समय में अधिकांश कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का संयुक्त उपयोग किया जाता है, जिसे ‘स्टैंडर्ड कैंसर प्रोटोकॉल ‘ माना जाता है। जब कैंसर किसी एक स्थान तक सीमित होता है और उसका फैलाव कम होता है, तब सर्जरी को प्राथमिक उपचार माना जाता है, जिसका उद्देश्य ट्यूमर को पूर्णतः हटाना और कैंसर के प्रसार को रोकना होता है।

कैंसर कोशिकाएँ अत्यंत तीव्र गति से विभाजित होती हैं, इसलिए कीमोथेरेपी जैसी दवाओं के माध्यम से दी जाती है जो तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। हालांकि इसके साथ बाल झड़ना, मितली-उल्टी, कमजोरी तथा प्रतिरक्षा शक्ति में कमी जैसे दुष्प्रभाव देखे जाते हैं। सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने, ट्यूमर को छोटा करने तथा दर्द एवं रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए रेडिएशन थेरेपी दी जाती है, जिसके सामान्य दुष्प्रभावों में थकान और प्रभावित त्वचा में जलन शामिल हैं।

इन उपचारों से जीवनरक्षा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त होती है, फिर भी रोगियों को उपचार के दौरान और बाद में थकान, कमजोरी, भूख में कमी, प्रतिरक्षा में गिरावट, मानसिक तनाव तथा पुनर्वास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि विश्वभर में इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी की अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिसमें आधुनिक चिकित्सा के साथ सुरक्षित सहायक उपचारों को जोड़ा जाता है, ताकि रोगी के समग्र स्वास्थ्य और जीवन-गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैनेडियन कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड योग के प्रमुख आयुर्वेदाचार्य डॉ. हरीश वर्मा ने बताया कि प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के आधार पर कैंसर रोगियों के उपचार हेतु एक विशेष आयुर्वेदिक फॉर्मूला विकसित किया है। यह फॉर्मूला दो समूहों की औषधीय जड़ी-बूटियों को विशेष अनुपात में संयोजित कर तैयार किया गया है और इसे समन्वित रूप से दिया जाता है।

डॉ. वर्मा के अनुसार यह आयुर्वेदिक फॉर्मूला शरीर की शक्ति, प्रतिरक्षा क्षमता और वजन को बनाए रखने में सहायक है तथा रिकवरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही यह कीमोथेरेपी और रेडिएशन के दुष्प्रभावों को कम करने, शरीर से विषैले तत्वों के निष्कासन तथा रोगियों के समग्र स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

कैंसर के सामान्य चेतावनी संकेत

शरीर में होने वाले असामान्य और लंबे समय तक बने रहने वाले परिवर्तनों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और जाँच से उपचार की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। निम्न लक्षण यदि लगातार बने रहें, तो चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें:

* शरीर में नई गाँठ या सूजन – विशेष रूप से स्तन, गर्दन, बगल या अंडकोष में।
* बिना कारण अचानक वजन कम होना – पेट, अग्नाशय या फेफड़ों से संबंधित गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
* लगातार कमजोरी या अत्यधिक थकान – पर्याप्त आराम के बाद भी कमजोरी बनी रहना।
* लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द – सामान्य उपचार से ठीक न होना।
* त्वचा में असामान्य बदलाव – त्वचा का मोटा या लाल होना अथवा रंग में परिवर्तन।
* लगातार खाँसी या खाँसी में खून – 3–4 सप्ताह से अधिक खाँसी रहना।
* असामान्य रक्तस्राव – मल, पेशाब, खाँसी या अन्य स्थान से।
* घाव का न भरना – विशेष रूप से मुँह का घाव 3 सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न होना।
* निगलने में कठिनाई – भोजन या पानी निगलने में परेशानी।
* मल या पेशाब की आदतों में बदलाव – कोलन या ब्लैडर से संबंधित समस्या का संकेत हो सकता है।

उपचार के दौरान पोषण का महत्व

कीमोथेरेपी और रेडिएशन के दौरान हल्का एवं सुपाच्य भोजन अत्यंत आवश्यक होता है। खिचड़ी, दाल का सूप, सब्जियों का सूप, दलिया, ओट्स, नारियल पानी, फ्रूट स्मूदी और दही-चावल जैसे आहार शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं तथा पाचन पर अतिरिक्त भार नहीं डालते।

प्रतिरक्षा बढ़ाने हेतु हल्दी वाला दूध, तुलसी की चाय, अदरक, काली मिर्च, लहसुन, आंवला और गिलोय उपयोगी माने जाते हैं। साथ ही अनार, पपीता, सेब, गाजर, चुकंदर, ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक एवं अन्य हरी पत्तेदार सब्जियाँ और कद्दू को दैनिक आहार में शामिल करना लाभकारी है। कैंसर एवं कीमोथेरेपी के कारण मांसपेशियाँ कमजोर हो सकती हैं, इसलिए पर्याप्त प्रोटीन का सेवन आवश्यक है। विशेषज्ञ हर 2–3 घंटे में थोड़ा-थोड़ा भोजन लेने की सलाह देते हैं।

आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेदिक सहायक उपचारों का समन्वय कैंसर उपचार की भविष्य की दिशा बनता जा रहा है, जिसका उद्देश्य रोगियों की जीवन-गुणवत्ता में सुधार लाना और उपचार के दौरान तथा बाद में बेहतर पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

रोगियों की सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर 92207-46669 जारी किया गया है।

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