“कोई भूखा न सोए” — पवन गोयल का दिल्ली में 250 अटल फूड कैंटीन का संकल्प

दिल्ली में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए — इस संकल्प को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए समाजसेवी पवन गोयल ने “Delhi Food Care Fund” के अंतर्गत अटल फूड कैंटीन विस्तार अभियान को तेज कर दिया है। राजधानी के लगभग 100 स्थानों पर पहले से संचालित ₹5 भोजन योजना से हजारों जरूरतमंद प्रतिदिन लाभान्वित हो रहे हैं। अब लक्ष्य रखा गया है कि दिल्ली के सभी 250 वार्डों में कम से कम 250 अटल फूड कैंटीन स्थापित की जाएँ, ताकि हर गरीब, श्रमिक और निम्न-आय वर्ग के व्यक्ति को सस्ती व सम्मानजनक दर पर भोजन मिल सके।

इस अभियान के अगले चरण में पवन गोयल ने 15 दिनों का विशेष संपर्क अभियान घोषित किया है। इसके तहत दिल्ली सरकार के प्रतिनिधियों, कॉरपोरेट क्षेत्र, समाज के सक्षम वर्ग (क्रीमी लेयर), गैर-सरकारी संगठनों (NGO) तथा दानदाता संस्थाओं से लगातार बैठकें कर सहयोग का आग्रह किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य केवल धन जुटाना नहीं, बल्कि “फूड सपोर्ट पार्टनर” का एक स्थायी नेटवर्क बनाना है, जिससे कैंटीनों का संचालन दीर्घकालिक और पारदर्शी ढंग से चल सके।

पवन गोयल का कहना है कि दिल्ली जैसे महानगर में ऑटो-रिक्शा चालक, कैब ड्राइवर (ओला-उबर), ई-रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, दिहाड़ी मजदूर और अन्य मेहनतकश वर्ग दिन-रात शहर की सेवा करते हैं, लेकिन बढ़ती महँगाई के कारण पौष्टिक भोजन तक उनकी पहुँच कठिन होती जा रही है। ₹5 भोजन योजना न केवल भूख मिटाने का माध्यम है, बल्कि यह सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक समानता का प्रतीक भी है।

विशेषज्ञों का मत है कि यदि अटल फूड कैंटीनों का विस्तार सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल पर किया जाए तो शहरी भूख और कुपोषण जैसी गंभीर चुनौतियों को कम करने में यह पहल अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकती है। इससे न केवल जरूरतमंदों को नियमित भोजन मिलेगा, बल्कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और जनसहयोग के माध्यम से समाज में भागीदारी की भावना भी मजबूत होगी।

“कोई भूखा न सोए — सबको भोजन मिले” के संदेश के साथ यह अभियान दिल्ली में भोजन अधिकार की दिशा में एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है। 15-दिवसीय संपर्क अभियान के बाद विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग से 250 वार्डों में 250 अटल फूड कैंटीन स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की योजना बनाई गई है, ताकि राजधानी में भूख के खिलाफ एक स्थायी समाधान विकसित किया जा सके।

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