एल्युमीनियम मिश्रधातुओं का क्षरण रोकने के लिए नई तकनीक

नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिकों ने एक पर्यावरण अनुकूल तकनीक विकसित की है, जो वायुयान निर्माण, वस्त्र उद्योग और मोटर वाहन निर्माण कार्यों में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली उच्च क्षमता वाली एल्युमीनियम मिश्रधातुओं को क्षरण से बचा सकती है। इस प्रक्रिया का नाम माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (एमएओ) है।स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एमएओ प्रक्रिया को विकसित किया गया है।

कम घनत्व और उच्च विशिष्ट शक्ति के कारण एल्युमीनियम मिश्रधातुओं का उपयोग वायुयान निर्माण (एयरोस्पेस), वस्त्र उद्योग और मोटर वाहन निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर होता है। एल्युमीनियम मिश्रित धातु का उपयोग वायुयान निर्माण में लैंडिंग गियर, विंग स्पर, और विमान का मुख्य ढाँचा, प्रेशर केबिन आदि बनाने में होता है। इन कलपुर्जों को टूट-फूट और जंग से होने वाले नुकसान तथा जीवनकाल से अधिक समय तक उपयोग के चलते प्रतिरोध की आवश्यकता होती है।

एल्युमीनियम मिश्रधातुओं को जंग लगने से बचाने के लिए अधिकतर हार्ड एनोडाइजिंग (एचए) प्रक्रिया अपनायी जाती है, जिसके अंतर्गत इस मिश्रधातु पर एक इलेक्ट्रोलाइट-आधारित कोटिंग की जाती है। इसमें सल्फ्यूरिक/ऑक्सेलिक आधारित इलेक्ट्रोलाइट्स का प्रयोग करना शामिल हैं, जो न केवल जहरीले धुएं का उत्सर्जन करते हैं, बल्कि प्रसंस्करण के दौरान उनको संभालना भी जोखिम भरा होता है। इसके साथ ही यह वायु को प्रदूषित भी करता है। यह तकनीक इन चुनौतियों से निजात दिला सकती है।

माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (एमएओ) एक उच्च-वोल्टेज पर संचालितकी जाने वाली एनोडिक-ऑक्सीकरण प्रक्रिया है, जो एक विद्युत रासायनिक विधि के माध्यम से धातु सब्सट्रेट पर ऑक्साइड फिल्म बनाती है। अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) टीम ने शॉट पीनिंग के लिए एक डुप्लेक्स ट्रीटमेंट को डिजाइन व विकसित किया है, जिसके अंतर्गत धातुओं और मिश्रधातुओं के यांत्रिक गुणों को संशोधित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया अपनायी जाती है, और उसके बाद उन पर माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण कोटिंग की जाती है।

अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) में हुई जांच से पता चला है कि डुप्लेक्स ट्रीटमेंट के बाद एमएओ कोटिंग करने से एल्युमीनियम मिश्रधातु से बने उपकरणों की टूट-फूट कम होने के साथ ही उनका क्षरण के प्रति प्रतिरोध भी बढ़ा है, और उनका जीवनकाल भी उल्लेखनीय रूप से अधिक हो गया है। डुप्लेक्स ट्रीटमेंट को विभिन्न एल्युमीनियम मिश्रित धातुओं के लिए भी प्रभावी बताया गया है।

माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (एमएओ) नामक इस तकनीक को भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत स्वायत्त संगठन अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) ने विकसित किया है।एआरसीआई में विकसित एमएओ प्रक्रिया को भारत और विदेशों में पेटेंट कराया गया है। एआरसीआई के शोधकर्ताओं को माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (एमएओ) प्रणाली की प्रयोगशालाओं के डिजाइन और विकास में महारत हासिल है। (इंडिया साइंस वायर)

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