94 वर्षीय बुज़ुर्ग पर सफलतापूर्वक हर्निया की रोबोटिक सर्जरी की गई – जाहिर है, अत्याधुनिक सर्जरी के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं

नई दिल्ली: सर्जरी की अत्याधुनिक तकनीक से गंभीर-से-गंभीर मरीजों और काफी उम्रदराज मरीज़ों की जिन्दगी बदल रही है। इसका एक सराहनीय उदाहरण है 94 वर्षीय बुज़ुर्ग की सफलतापूर्वक हर्निया की रोबोटिक सर्जरी किया जाना। मरीज को दोनों तरफ़ बड़ा इंग्वाइनल हर्निया था और दिल की बीमारियों सहित कई अन्य गंभीर समस्याएं थीं। उनकी सफल सर्जरी से यह साबित हो गया है कि कठिन सर्जरी के रास्ते उम्र कोई रुकावट नहीं रही।

यह सर्जरी डॉ. आशीष गौतम, प्रिंसिपल डायरेक्टर, रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली ने की। मरीज़ की ज्यादा उम्र और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए सर्जरी की बहुत विस्तृत प्लानिंग और बारीकी से सर्जरी करने की ज़रूरत थी। रोबोटिक तकनीक का लाभ उठाते हुए यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके कई लाभ हुए जैसे बहुत कम खून का नुकसान, ऑपरेशन के बाद बहुत कम तकलीफ और उम्मीद से तेज रिकवरी।

सर्जरी के बाद मरीज़ श्री बृज मोहन आनंद जल्द ठीक हो गए। पहले फ़ॉलो-अप में क्लिनिकल सफलता और क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़ दोनों में काफी सुधार दिखा। श्री बृज मोहन आनंद का केस हर्निया के जटिल मामलों में रोबोटिक सर्जरी की बढ़ती भूमिका का शानदार उदाहरण है। खास कर बुज़ुर्ग मरीज़ों में इसकी अहमियत बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें अधिक बारीक और न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी की ज़रूरत है।

आम सर्जरी की तुलना में हर्निया की रोबोटिक सर्जरी के कई फ़ायदे हैं जैसे सर्जरी का अधिक बारीकी से होना, इस दौरान बेहतर विज़ुअल मिलना, छोटे चीरे, कम दर्द, बाद में समस्याएं होने का कम खतरा और जल्द रिकवरी। ये लाभ खास कर बुज़ुर्ग और उन मरीज़ों के लिए अधिक अहमियत रखते हैं जिन्हें कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं और सर्जिकल ट्रॉमा कम से कम हो यह ज़रूरी है।

डॉ. आशीष गौतम, प्रिंसिपल डायरेक्टर, रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली ने इस मरीज के बारे में कहा, ‘‘ सिर्फ इस आधार पर कि मरीज़ की उम्र अधिक हो गई है यह तय करना उचित नहीं कि उसकी सर्जरी करना सही होगा या नहीं। हम रोबोटिक टेक्नोलॉजी से बहुत कठिन मामलों में भी सफलतावूर्पक सर्जरी कर सकते हैं। बारीकी से मरीज की स्थिति देखने के साथ-साथ पूरी एक्सपर्टीज़ हो तो ऐसे मामलों में भी कामयाबी मिलती है। श्री बृज मोहन आनंद की बेहतरीन रिकवरी से यह जाहिर है कि रोबोटिक सर्जरी के बहुत अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। खासकर बुज़ुर्ग मरीज़ों के लिए इसका विशेष लाभ है, जिन्हें कम तकलीफ, कम से कम खून का नुकसान और जल्द रिकवरी चाहिए।’’

श्री बृज मोहन आनंद ने अपना अनुभव बताया, ‘‘मेरी उम्र में सर्जरी को लेकर मेरे परिवार का और खुद मुझे चिंतित होना स्वाभाविक था। लेकिन डॉ. आशीष गौतम और उनकी टीम ने हमारा हौसला बुलंद किया। सर्जरी में कोई रुकावट नहीं आई। मुझे बहुत कम दर्द हुआ और रिकवरी भी इतनी जल्द हुई, जो हम ने सोचा नहीं था। डॉ. गौतम और उनकी पूरी टीम के अथक प्रयास से मुझे एक बार फिर आराम की जिन्दगी मिली और मेरा आत्मविश्वास लौट आया। मैं आजीवन सभी का आभारी रहूंगा।’’ 

रोबोटिक सर्जरी का चलन बढ़ने के साथ मिनिमली इनवेसिव सर्जरी का दायरा भी बढ़ रहा है। इस तरह के सफल मामले अधिक जोखिम भरे और कठिन सर्जरी को अंजाम देने में रोबोटिक सर्जरी की अहमियत बताते हैं। इसके तमाम लाभ दर्शाते हैं, जैसे अधिक बारीक सर्जरी, न्यूनतम ट्रॉमा और तेज़ी से रिकवरी। हर उम्र के मरीज़ों के लिए बेहतर परिणाम मिलने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होने का भरोसा बढ़ाते है। ऐसे में 90 वर्ष से अधिक उम्र में भी लोग सर्जरी से तकलीफ दूर करने की सोच सकते हैं।

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